श्रुति‍ प्रकाशनसँ प्रकाशि‍त महत्‍वपूर्ण मैथि‍ली पोथी

Pallavi Distributors मोवाइल- ९५७२४५०४०५Ward no- 6, Nirmali (Supaul)
श्रुति‍ प्रकाशनसँ प्रकाशि‍त महत्‍वपूर्ण मैथि‍ली पोथीक्र.सं पोथीक नाम रचनाकार/लेखक दाम

१ जी‍नोम मैपि‍ंग (पंजी-प्रबंध) गजेन्‍द्र ठाकुर ५०००
1a. पञ्जी तारपत्रक 11000 जे.पी.जी. इमेजक डी.वी.डी. १०००

२ नताशा (कॉमि‍क्‍स) देवांशु वत्‍स १५०

३ वि‍देह कथा २००९-१० (कथा संग्रह)[विदेह:सदेह;४] गजेन्‍द्र ठाकुर, उमेश मंडल आदि‍ १००

४ वि‍देह पद्द २००९-१० (कवि‍ता संग्रह)[विदेह:सदेह:३] गजेन्‍द्र ठाकुर, उमेश मंडल आदि‍ १००

५ वि‍देह प्रबन्‍ध समालोचना २००९-१० (नि‍बंध संग्रह)[विदेह:सदेह:२] गजेन्‍द्र ठाकुर, उमेश मंडल आदि‍ १००

६ कुरूक्षेत्रम् अन्‍तर्मनक; (उपन्‍यास, कथा, कवि‍ता आदि) गजेन्‍द्र ठाकुर १००

७ नो इन्‍ट्री मा प्रवि‍श (नाट्क) डॉ. उदय नारायण सि‍ंह नचि‍केता ७५

८ बनैत-बि‍गड़ैत (कथा-संग्रह) सुभाष चन्‍द्र यादव १००

९ गामक जि‍नगी (कथा संग्रह) जगदीश प्रसाद मंडल २००

१० मौलाइल गाछक फूल (उपन्‍यास) जगदीश प्रसाद मंडल २५०

११ जि‍नगीक जीत (उपन्‍यास) जगदीश प्रसाद मंडल २५०

१२ जीवन-मरण (उपन्‍यास) जगदीश प्रसाद मंडल २५०

१३ उत्‍थान-पतन (उपन्‍यास) जगदीश प्रसाद मंडल २५०

१४ जीवन संघर्ष (उपन्‍यास) जगदीश प्रसाद मंडल २५०

१५ मि‍थि‍लाक बेटी (नाट्क) जगदीश प्रसाद मंडल १६०

१६ फूलक घौंदा (लघु कथा संग्रह) जगदीश प्रसाद मंडल २००

१७ भाग रौ आ बलचन्‍द्रा (नाट्क) ि‍वभा रानी १००

१८ हम पुछैत छी (कवि‍ता संग्रह) ि‍वनी‍त उत्‍पल १६०

१९ मैि‍थली चि‍त्रकथा (कॉंमि‍क्‍स) प्रीति‍ ठाकुर १००

२० गोनू झा आ आन मैथि‍ली चि‍त्र-कथा (कॉंमि‍क्‍स) प्रीति‍ ठाकुर १००

२१ मैथि‍ली भाषा साहि‍त्‍य: २०म शताब्‍दी (नि‍बंध संग्रह) प्रेम शंकर सि‍ंह मैथि‍ली- ४००

२२ मैथि‍ली चि‍त्रकथा नीतू कुमारी १००

२३ English-Maithili Dictionary V-1 Gajendra Thakur 500

२४ अंग्रेजी-मैथि‍ली शब्‍दकोश खण्‍ड-1 गजेन्‍द्र ठाकुर ५००

२५ अंग्रेजी-मैथि‍ली शब्‍दकोश खण्‍ड-2 गजेन्‍द्र ठाकुर ५००

२६ विदेह: सदेह: 1 (Devanagari) गजेन्‍द्र ठाकुर १००

२७ विदेह: सदेह: 1 (Tirhuta) गजेन्‍द्र ठाकुर २००

२८ त्‍वंचाहंच आ असंजाति‍ मन (गीत-प्रबन्‍ध) गजेन्‍द्र ठाकुर ५०

२९ सहस्‍त्रबाढ़नि‍ (उपन्‍यास) गजेन्‍द्र ठाकुर ५०

३० सहस्‍त्राब्‍दीक चौपड़पर (पद्य संग्रह) गजेन्‍द्र ठाकुर ५०

३१ गल्‍प गुच्‍छ (कथा संग्रह) गजेन्‍द्र ठाकुर ५०

३२ संकर्षण (नाट्क) गजेन्‍द्र ठाकुर ५०

३३ प्रबन्‍ध- नि‍बंध-समालोचना गजेन्‍द्र ठाकुर ५०

३४ बाल (नाट्क – (कथा- कवि‍ता) गजेन्‍द्र ठाकुर ५०
34a. अर्चिस्- (कविता/हाइकू संग्रह)- ज्योति सुनीत चौधरी १५०




शीघ्र प्रकाश्य


३५

मि‍थि‍लाक संस्‍कार/वि‍धि‍-व्‍यवहार गीत आ गीतनाद (गीत संकलन)

उमेश मंडल


३६

प्रबन्‍ध- नि‍बंध-समालोचना खण्‍ड-2

गजेन्‍द्र ठाकुर


३७

सहस्‍त्रशीर्षा (उपन्‍यास)

गजेन्‍द्र ठाकुर

३८

सहस्‍त्रजि‍त् (पद्य संग्रह)

गजेन्‍द्र ठाकुर

३९

शब्‍दशास्‍त्रम् (कथा-गल्‍प संग्रह)

गजेन्‍द्र ठाकुर


४०

उल्‍का मुख (नाट्क)

गजेन्‍द्र ठाकुर


४१

जलोदीप (नाट्क)

गजेन्‍द्र ठाकुर


४२

नाराशंसी (गीत-प्रबन्‍ध)

गजेन्‍द्र ठाकुर

४३

बांगक बगौड़ा (पद्य संग्रह)

गजेन्‍द्र ठाकुर

४४

अक्षरमुष्‍टि‍का (खि‍स्‍सा-पि‍हानी संग्रह)

गजेन्‍द्र ठाकुर


४५

नि‍बंध दर्शन (नि‍बंध संग्रह)

जगदीश प्रसाद मंडल


४६

कथा दर्शन (कथा संग्रह)

जगदीश प्रसाद मंडल

४७

विदेह कोश अंग्रेजी-मैथि‍ली शब्‍दकोश

गजेन्‍द्र ठाकुर

४८

VIDEHA DICTIONARY English-Maithili Dictionary

Gajendra Thakur


४९

अम्‍बरा (कवि‍ता संग्रह)

राजदेव मंडल

५०

पुरुष-परीक्षा (कॉंमि‍क्‍स)

प्रीति‍ ठाकुर

५१

मिथिलाक लोकदेवता आ आन मैथि‍ली चि‍त्र-कथा (कॉंमि‍क्‍स)

प्रीति‍ ठाकुर

५२

पंचदेवोपासना भूमि मथिला

प्रफुल्ल कुमार सिंह”मौन”

५३

मिथिलाक इतिहास

प्रोफेसर राधाकृष्ण चौधरी

५४

A Survey of Maithili Literature

Radhakrishna Chaudhary


पहि‍ल- मैथि‍ली ब्रेल पोथी

५५

सहस्‍त्रबाढ़नि‍ (उपन्‍यास)

गजेन्‍द्र ठाकुर १००





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कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक (पेपरबैक) खण्ड-१ प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना- गजेन्द्र ठाकुर रु.५०/-US$20 [Ist Paperback Edition 2009 ISBN NO.978-93-80538-15-0]

कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक (पेपरबैक)खण्ड-२ उपन्यास-(सहस्रबाढ़नि)- गजेन्द्र ठाकुररु.५०/-US$20 [Ist Paperback Edition 2009 ISBN NO.978-93-80538-16-7]

कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक (पेपरबैक)खण्ड-३ पद्य-संग्रह-(सहस्त्राब्दीक चौपड़पर)- गजेन्द्र ठाकुररु.५०/-US$20 [Ist Paperback Edition 2009 ISBN NO.978-93-80538-17-4]

कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक (पेपरबैक)खण्ड-४ कथा-गल्प संग्रह (गल्प गुच्छ)- गजेन्द्र ठाकुररु.५०/-US$20 [Ist Paperback Edition 2009 ISBN NO.978-93-80538-18-1]

कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक (पेपरबैक)खण्ड-५ नाटक-(संकर्षण)- गजेन्द्र ठाकुररु.५०/-US$20 [Ist Paperback Edition 2009 ISBN NO.978-93-80538-19-8]

कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक (पेपरबैक)खण्ड-६ महाकाव्य- (१. त्वञ्चाहञ्च आ २. असञ्जाति मन )- गजेन्द्र ठाकुररु.५०/-US$20 [Ist Paperback Edition 2009 ISBN NO.978-93-80538-20-4]

कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक (पेपरबैक)खण्ड-७ बालमंडली किशोर-जगत)- गजेन्द्र ठाकुर मूल्य रु.५०/-US$20 [Ist Paperback Edition 2009 ISBN NO.978-93-80538-21-1]

विभारानीक दूटा नाटक (भाग रौ आ बलचन्दा)रु.१००/- US$25 [Ist Paperback Edition 2009 ISBN NO.978-93-80538-01-3]

मैथिली चित्रकथा- प्रीति ठाकुर रु.१००/-US$80 [Ist Edition 2009 ISBN NO.978-93-80538-13-6]

मैथिली चित्रकथा-नीतू कुमारी रु.१००/-US$80 [Ist Edition 2009 ISBN NO.978-93-80538-14-3]

नताशा (मैथिली चित्र शृंखला)- देवांशु वत्स रु.१५०/- US$60 [Ist Edition 2009 ISBN NO.978-93-80538-04-4]

हम पुछैत छी- (कविता संग्रह)- विनीत उत्पल रु.१६०/- US$25 [Ist Edition 2009 ISBN NO.978-93-80538-05-1]

अर्चिस्- (कविता/हाइकू संग्रह)- ज्योति सुनीत चौधरी रु.१५०/- US$25 [Ist Edition 2009 ISBN NO.978-93-80538-06-8]

मौलाइल गाछक फूल-(उपन्यास)- जगदीश प्रसाद मंडल रु.२५०/- US$40 [Ist Edition 2009 ISBN NO.978-93-80538-02-0]

मिथिलाक बेटी-(नाटक)- जगदीश प्रसाद मंडल रु.१६०/- US$25 [Ist Edition 2009 ISBN NO.978-93-80538-03-7]


विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) सम्पादक- गजेन्द्र ठाकुर, सहायक सम्पादक- रश्मिरेखा सिन्हा आ उमेश मंडल, भाषा सम्पादन- नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा रु.१००/- US$25 [Edition 2010 ISBN NO.978-93-80538-09-9]

विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) सम्पादक- गजेन्द्र ठाकुर, सहायक सम्पादक- रश्मिरेखा सिन्हा आ उमेश मंडल, भाषा सम्पादन- नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा रु.१००/- US$25 [Edition 2010 ISBN NO.978-93-80538-08-2]

विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) सम्पादक- गजेन्द्र ठाकुर, सहायक सम्पादक- रश्मिरेखा सिन्हा आ उमेश मंडल, भाषा सम्पादन- नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा रु.१००/- US$25 [Edition 2010 ISBN NO.978-93-80538-07-5]

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NATASHA BY DEVANSHU VATSA, IST MAITHILI COMICS
NATASHA BY DEVANSHU VATSA, IST MAITHILI COMICS
ISBN No.978-93-80538-00-6
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Price: Rs. 150/- (INR)- for individual buyers in India and Nepal US $ 60 for Libraries and institutions (India and abroad)
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गजेन्द्र ठाकुरक शीघ्र प्रकाश्य पोथी सभ
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१.कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक सात खण्डक बाद गजेन्द्र ठाकुरक
कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक-२
खण्ड-८
(प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना-२) क संग
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२.सहस्रबाढ़नि क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर उपन्यास
स॒हस्र॑ शीर्षा॒
...............................................................................
३.सहस्राब्दीक चौपड़पर क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर पद्य-संग्रह

स॑हस्रजित्
.............................................................................
४.गल्प गुच्छ क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर कथा-गल्प संग्रह

शब्दशास्त्रम्

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५.संकर्षण क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर नाटक

उल्कामुख
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६. त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन क बाद गजेन्द्र ठाकुरक तेसर गीत-प्रबन्ध
नाराश‍ं॒सी
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७. नेना-भुटका आ किशोरक लेल गजेन्द्र ठाकुरक तीनटा नाटक

जलोदीप

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८.नेना-भुटका आ किशोरक लेल गजेन्द्र ठाकुरक पद्य संग्रह

बाङक बङौरा

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९.नेना-भुटका आ किशोरक लेल गजेन्द्र ठाकुरक खिस्सा-पिहानी संग्रह

अक्षरमुष्टिका

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कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक- गजेन्द्र ठाकुर

Ist edition 2009 of Gajendra Thakur’s KuruKshetram-Antarmanak (Vol. I to VII)- essay-paper-criticism, novel, poems, story, play, epics and Children-grown-ups literature in single binding:
खण्ड-१ प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना
खण्ड-२ उपन्यास-(सहस्रबाढ़नि)
खण्ड-३ पद्य-संग्रह-(सहस्त्राब्दीक चौपड़पर)
खण्ड-४ कथा-गल्प संग्रह (गल्प गुच्छ)
खण्ड-५ नाटक-(संकर्षण)
खण्ड-६ महाकाव्य- (१. त्वञ्चाहञ्च आ २. असञ्जाति मन )
खण्ड-७ बालमंडली किशोर-जगत
Language:Maithili

692 pages : मूल्य भा. रु. 100/-(for individual buyers inside india)

(add courier charges Rs.50/-per copy for Delhi/NCR and Rs.100/- per copy for outside Delhi)

For Libraries and overseas buyers $40 US (including postage)


सहस्रबाढ़नि (मैथिलीक पहिल ब्रेल पुस्तक)-ISBN:978-93-80538-00-6

Price Rs.100/-(for individual buyers) US$40 (Library/ Institution- Indian & abroad)
(add courier charges Rs.50/-per copy for Delhi/NCR and Rs.100/- per copy for outside Delhi)
The books are AVAILABLE FOR PDF DOWNLOAD AT
http://videha123.wordpress.com/
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मंतव्य:

[ विदेह ई-पत्रिका, विदेह:सदेह मिथिलाक्षर आ देवनागरी आ गजेन्द्र ठाकुरक सात खण्डक संग्रह कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मादेँ। ]

१.श्री गोविन्द झा- विदेहकेँ तरंगजालपर उतारि विश्वभरिमे मातृभाषा मैथिलीक लहरि जगाओल, खेद जे अपनेक एहि महाभियानमे हम एखन धरि संग नहि दए सकलहुँ। सुनैत छी अपनेकेँ सुझाओ आ रचनात्मक आलोचना प्रिय लगैत अछि तेँ किछु लिखक मोन भेल। हमर सहायता आ सहयोग अपनेकेँ सदा उपलब्ध रहत।

२.श्री रमानन्द रेणु- मैथिलीमे ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ चला कऽ जे अपन मातृभाषाक प्रचार कऽ रहल छी, से धन्यवाद । आगाँ अपनेक समस्त मैथिलीक कार्यक हेतु हम हृदयसँ शुभकामना दऽ रहल छी।

३.श्री विद्यानाथ झा "विदित"- संचार आ प्रौद्योगिकीक एहि प्रतिस्पर्धी ग्लोबल युगमे अपन महिमामय "विदेह"केँ अपना देहमे प्रकट देखि जतबा प्रसन्नता आ संतोष भेल, तकरा कोनो उपलब्ध "मीटर"सँ नहि नापल जा सकैछ? ..एकर ऐतिहासिक मूल्यांकन आ सांस्कृतिक प्रतिफलन एहि शताब्दीक अंत धरि लोकक नजरिमे आश्चर्यजनक रूपसँ प्रकट हैत।

४. प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।...विदेहक चालीसम अंक पुरबाक लेल अभिनन्दन।

५. डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मन, मैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंग, इतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक अध्याय आरंभ करत, हमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्ग, सस्नेह...अहाँक पोथी कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रथम दृष्टया बहुत भव्य तथा उपयोगी बुझाइछ। मैथिलीमे तँ अपना स्वरूपक प्रायः ई पहिले एहन भव्य अवतारक पोथी थिक। हर्षपूर्ण हमर हार्दिक बधाई स्वीकार करी।

६. श्री रामाश्रय झा "रामरंग"(आब स्वर्गीय)- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि।

७. श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी- साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बधाई आ शुभकामना स्वीकार करू।

८. श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना।

९.डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि "विदेह"क सफलताक शुभकामना।

१०. श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब।

११. श्री विजय ठाकुर- मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ।

१२. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका "विदेह" क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि।

१३. श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका "विदेह" केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत।

१४. डॉ. श्री भीमनाथ झा- "विदेह" इन्टरनेट पर अछि तेँ "विदेह" नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब।कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि अति प्रसन्नता भेल। मैथिलीक लेल ई घटना छी।

१५. श्री रामभरोस कापड़ि "भ्रमर"- जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत, से विश्वास करी।

१६. श्री राजनन्दन लालदास- "विदेह" ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी, नातिक अहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अ‍ंक जखन प्रिं‍ट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल।.. उत्कृष्ट प्रकाशन कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक लेल बधाइ। अद्भुत काज कएल अछि, नीक प्रस्तुति अछि सात खण्डमे। मुदा अहाँक सेवा आ से निःस्वार्थ तखन बूझल जाइत जँ अहाँ द्वारा प्रकाशित पोथी सभपर दाम लिखल नहि रहितैक। ओहिना सभकेँ विलहि देल जइतैक। (स्पष्टीकरण- श्रीमान्, अहाँक सूचनार्थ विदेह द्वारा ई-प्रकाशित कएल सभटा सामग्री आर्काइवमे https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ पर बिना मूल्यक डाउनलोड लेल उपलब्ध छै आ भविष्यमे सेहो रहतैक। एहि आर्काइवकेँ जे कियो प्रकाशक अनुमति लऽ कऽ प्रिंट रूपमे प्रकाशित कएने छथि आ तकर ओ दाम रखने छथि ताहिपर हमर कोनो नियंत्रण नहि अछि।- गजेन्द्र ठाकुर)... अहाँक प्रति अशेष शुभकामनाक संग।

१७. डॉ. प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका "विदेह" प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछि, अहाँक निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखल, मन प्रफुल्लित भऽ गेल।

१८.श्रीमती शेफालिका वर्मा- विदेह ई-पत्रिका देखि मोन उल्लाससँ भरि गेल। विज्ञान कतेक प्रगति कऽ रहल अछि...अहाँ सभ अनन्त आकाशकेँ भेदि दियौ, समस्त विस्तारक रहस्यकेँ तार-तार कऽ दियौक...। अपनेक अद्भुत पुस्तक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक विषयवस्तुक दृष्टिसँ गागरमे सागर अछि। बधाई।

१९.श्री हेतुकर झा, पटना-जाहि समर्पण भावसँ अपने मिथिला-मैथिलीक सेवामे तत्पर छी से स्तुत्य अछि। देशक राजधानीसँ भय रहल मैथिलीक शंखनाद मिथिलाक गाम-गाममे मैथिली चेतनाक विकास अवश्य करत।

२०. श्री योगानन्द झा, कबिलपुर, लहेरियासराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीकेँ निकटसँ देखबाक अवसर भेटल अछि आ मैथिली जगतक एकटा उद्भट ओ समसामयिक दृष्टिसम्पन्न हस्ताक्षरक कलमबन्द परिचयसँ आह्लादित छी। "विदेह"क देवनागरी सँस्करण पटनामे रु. 80/- मे उपलब्ध भऽ सकल जे विभिन्न लेखक लोकनिक छायाचित्र, परिचय पत्रक ओ रचनावलीक सम्यक प्रकाशनसँ ऐतिहासिक कहल जा सकैछ।

२१. श्री किशोरीकान्त मिश्र- कोलकाता- जय मैथिली, विदेहमे बहुत रास कविता, कथा, रिपोर्ट आदिक सचित्र संग्रह देखि आ आर अधिक प्रसन्नता मिथिलाक्षर देखि- बधाई स्वीकार कएल जाओ।

२२.श्री जीवकान्त- विदेहक मुद्रित अंक पढ़ल- अद्भुत मेहनति। चाबस-चाबस। किछु समालोचना मरखाह..मुदा सत्य।

२३. श्री भालचन्द्र झा- अपनेक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि बुझाएल जेना हम अपने छपलहुँ अछि। एकर विशालकाय आकृति अपनेक सर्वसमावेशताक परिचायक अछि। अपनेक रचना सामर्थ्यमे उत्तरोत्तर वृद्धि हो, एहि शुभकामनाक संग हार्दिक बधाई।

२४.श्रीमती डॉ नीता झा- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। ज्योतिरीश्वर शब्दावली, कृषि मत्स्य शब्दावली आ सीत बसन्त आ सभ कथा, कविता, उपन्यास, बाल-किशोर साहित्य सभ उत्तम छल। मैथिलीक उत्तरोत्तर विकासक लक्ष्य दृष्टिगोचर होइत अछि।

२५.श्री मायानन्द मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मे हमर उपन्यास स्त्रीधनक जे विरोध कएल गेल अछि तकर हम विरोध करैत छी।... कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीक लेल शुभकामना।(श्रीमान् समालोचनाकेँ विरोधक रूपमे नहि लेल जाए।-गजेन्द्र ठाकुर)

२६.श्री महेन्द्र हजारी- सम्पादक श्रीमिथिला- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि मोन हर्षित भऽ गेल..एखन पूरा पढ़यमे बहुत समय लागत, मुदा जतेक पढ़लहुँ से आह्लादित कएलक।

२७.श्री केदारनाथ चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल, मैथिली साहित्य लेल ई पोथी एकटा प्रतिमान बनत।

२८.श्री सत्यानन्द पाठक- विदेहक हम नियमित पाठक छी। ओकर स्वरूपक प्रशंसक छलहुँ। एम्हर अहाँक लिखल - कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखलहुँ। मोन आह्लादित भऽ उठल। कोनो रचना तरा-उपरी।

२९.श्रीमती रमा झा-सम्पादक मिथिला दर्पण। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रिंट फॉर्म पढ़ि आ एकर गुणवत्ता देखि मोन प्रसन्न भऽ गेल, अद्भुत शब्द एकरा लेल प्रयुक्त कऽ रहल छी। विदेहक उत्तरोत्तर प्रगतिक शुभकामना।

३०.श्री नरेन्द्र झा, पटना- विदेह नियमित देखैत रहैत छी। मैथिली लेल अद्भुत काज कऽ रहल छी।

३१.श्री रामलोचन ठाकुर- कोलकाता- मिथिलाक्षर विदेह देखि मोन प्रसन्नतासँ भरि उठल, अंकक विशाल परिदृश्य आस्वस्तकारी अछि।

३२.श्री तारानन्द वियोगी- विदेह आ कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि चकबिदोर लागि गेल। आश्चर्य। शुभकामना आ बधाई।

३३.श्रीमती प्रेमलता मिश्र “प्रेम”- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। सभ रचना उच्चकोटिक लागल। बधाई।

३४.श्री कीर्तिनारायण मिश्र- बेगूसराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बड्ड नीक लागल, आगांक सभ काज लेल बधाई।

३५.श्री महाप्रकाश-सहरसा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक नीक लागल, विशालकाय संगहि उत्तमकोटिक।

३६.श्री अग्निपुष्प- मिथिलाक्षर आ देवाक्षर विदेह पढ़ल..ई प्रथम तँ अछि एकरा प्रशंसामे मुदा हम एकरा दुस्साहसिक कहब। मिथिला चित्रकलाक स्तम्भकेँ मुदा अगिला अंकमे आर विस्तृत बनाऊ।

३७.श्री मंजर सुलेमान-दरभंगा- विदेहक जतेक प्रशंसा कएल जाए कम होएत। सभ चीज उत्तम।

३८.श्रीमती प्रोफेसर वीणा ठाकुर- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक उत्तम, पठनीय, विचारनीय। जे क्यो देखैत छथि पोथी प्राप्त करबाक उपाय पुछैत छथि। शुभकामना।

३९.श्री छत्रानन्द सिंह झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ, बड्ड नीक सभ तरहेँ।

४०.श्री ताराकान्त झा- सम्पादक मैथिली दैनिक मिथिला समाद- विदेह तँ कन्टेन्ट प्रोवाइडरक काज कऽ रहल अछि। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल।

४१.डॉ रवीन्द्र कुमार चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बहुत नीक, बहुत मेहनतिक परिणाम। बधाई।

४२.श्री अमरनाथ- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक आ विदेह दुनू स्मरणीय घटना अछि, मैथिली साहित्य मध्य।

४३.श्री पंचानन मिश्र- विदेहक वैविध्य आ निरन्तरता प्रभावित करैत अछि, शुभकामना।

४४.श्री केदार कानन- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल अनेक धन्यवाद, शुभकामना आ बधाइ स्वीकार करी। आ नचिकेताक भूमिका पढ़लहुँ। शुरूमे तँ लागल जेना कोनो उपन्यास अहाँ द्वारा सृजित भेल अछि मुदा पोथी उनटौला पर ज्ञात भेल जे एहिमे तँ सभ विधा समाहित अछि।

४५.श्री धनाकर ठाकुर- अहाँ नीक काज कऽ रहल छी। फोटो गैलरीमे चित्र एहि शताब्दीक जन्मतिथिक अनुसार रहैत तऽ नीक।

४६.श्री आशीष झा- अहाँक पुस्तकक संबंधमे एतबा लिखबा सँ अपना कए नहि रोकि सकलहुँ जे ई किताब मात्र किताब नहि थीक, ई एकटा उम्मीद छी जे मैथिली अहाँ सन पुत्रक सेवा सँ निरंतर समृद्ध होइत चिरजीवन कए प्राप्त करत।

४७.श्री शम्भु कुमार सिंह- विदेहक तत्परता आ क्रियाशीलता देखि आह्लादित भऽ रहल छी। निश्चितरूपेण कहल जा सकैछ जे समकालीन मैथिली पत्रिकाक इतिहासमे विदेहक नाम स्वर्णाक्षरमे लिखल जाएत। ओहि कुरुक्षेत्रक घटना सभ तँ अठारहे दिनमे खतम भऽ गेल रहए मुदा अहाँक कुरुक्षेत्रम् तँ अशेष अछि।

४८.डॉ. अजीत मिश्र- अपनेक प्रयासक कतबो प्रश‍ंसा कएल जाए कमे होएतैक। मैथिली साहित्यमे अहाँ द्वारा कएल गेल काज युग-युगान्तर धरि पूजनीय रहत।

४९.श्री बीरेन्द्र मल्लिक- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक आ विदेह:सदेह पढ़ि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक स्वास्थ्य ठीक रहए आ उत्साह बनल रहए से कामना।

५०.श्री कुमार राधारमण- अहाँक दिशा-निर्देशमे विदेह पहिल मैथिली ई-जर्नल देखि अति प्रसन्नता भेल। हमर शुभकामना।

५१.श्री फूलचन्द्र झा प्रवीण-विदेह:सदेह पढ़ने रही मुदा कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि बढ़ाई देबा लेल बाध्य भऽ गेलहुँ। आब विश्वास भऽ गेल जे मैथिली नहि मरत। अशेष शुभकामना।

५२.श्री विभूति आनन्द- विदेह:सदेह देखि, ओकर विस्तार देखि अति प्रसन्नता भेल।

५३.श्री मानेश्वर मनुज-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक एकर भव्यता देखि अति प्रसन्नता भेल, एतेक विशाल ग्रन्थ मैथिलीमे आइ धरि नहि देखने रही। एहिना भविष्यमे काज करैत रही, शुभकामना।

५४.श्री विद्यानन्द झा- आइ.आइ.एम.कोलकाता- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक विस्तार, छपाईक संग गुणवत्ता देखि अति प्रसन्नता भेल।

५५.श्री अरविन्द ठाकुर-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मैथिली साहित्यमे कएल गेल एहि तरहक पहिल प्रयोग अछि, शुभकामना।

५६.श्री कुमार पवन-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़ि रहल छी। किछु लघुकथा पढ़ल अछि, बहुत मार्मिक छल।

५७. श्री प्रदीप बिहारी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखल, बधाई।

५८.डॉ मणिकान्त ठाकुर-कैलिफोर्निया- अपन विलक्षण नियमित सेवासँ हमरा लोकनिक हृदयमे विदेह सदेह भऽ गेल अछि।

५९.श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि- अहाँक समस्त प्रयास सराहनीय। दुख होइत अछि जखन अहाँक प्रयासमे अपेक्षित सहयोग नहि कऽ पबैत छी।

६०.श्री देवशंकर नवीन- विदेहक निरन्तरता आ विशाल स्वरूप- विशाल पाठक वर्ग, एकरा ऐतिहासिक बनबैत अछि।

६१.श्री मोहन भारद्वाज- अहाँक समस्त कार्य देखल, बहुत नीक। एखन किछु परेशानीमे छी, मुदा शीघ्र सहयोग देब।

६२.श्री फजलुर रहमान हाशमी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मे एतेक मेहनतक लेल अहाँ साधुवादक अधिकारी छी।

६३.श्री लक्ष्मण झा "सागर"- मैथिलीमे चमत्कारिक रूपेँ अहाँक प्रवेश आह्लादकारी अछि।..अहाँकेँ एखन आर..दूर..बहुत दूरधरि जेबाक अछि। स्वस्थ आ प्रसन्न रही।

६४.श्री जगदीश प्रसाद मंडल-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़लहुँ । कथा सभ आ उपन्यास सहस्रबाढ़नि पूर्णरूपेँ पढ़ि गेल छी। गाम-घरक भौगोलिक विवरणक जे सूक्ष्म वर्णन सहस्रबाढ़निमे अछि, से चकित कएलक, एहि संग्रहक कथा-उपन्यास मैथिली लेखनमे विविधता अनलक अछि। समालोचना शास्त्रमे अहाँक दृष्टि वैयक्तिक नहि वरन् सामाजिक आ कल्याणकारी अछि, से प्रशंसनीय।

६५.श्री अशोक झा-अध्यक्ष मिथिला विकास परिषद- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल बधाई आ आगाँ लेल शुभकामना।

६६.श्री ठाकुर प्रसाद मुर्मु- अद्भुत प्रयास। धन्यवादक संग प्रार्थना जे अपन माटि-पानिकेँ ध्यानमे राखि अंकक समायोजन कएल जाए। नव अंक धरि प्रयास सराहनीय। विदेहकेँ बहुत-बहुत धन्यवाद जे एहेन सुन्दर-सुन्दर सचार (आलेख) लगा रहल छथि। सभटा ग्रहणीय- पठनीय।

६७.बुद्धिनाथ मिश्र- प्रिय गजेन्द्र जी,अहाँक सम्पादन मे प्रकाशित ‘विदेह’आ ‘कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक’ विलक्षण पत्रिका आ विलक्षण पोथी! की नहि अछि अहाँक सम्पादनमे? एहि प्रयत्न सँ मैथिली क विकास होयत,निस्संदेह।

६८.श्री बृखेश चन्द्र लाल- गजेन्द्रजी, अपनेक पुस्तक कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक पढ़ि मोन गदगद भय गेल , हृदयसँ अनुगृहित छी । हार्दिक शुभकामना ।

६९.श्री परमेश्वर कापड़ि - श्री गजेन्द्र जी । कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक पढ़ि गदगद आ नेहाल भेलहुँ।

७०.श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर- विदेह पढ़ैत रहैत छी। धीरेन्द्र प्रेमर्षिक मैथिली गजलपर आलेख पढ़लहुँ। मैथिली गजल कत्तऽ सँ कत्तऽ चलि गेलैक आ ओ अपन आलेखमे मात्र अपन जानल-पहिचानल लोकक चर्च कएने छथि। जेना मैथिलीमे मठक परम्परा रहल अछि। (स्पष्टीकरण- श्रीमान्, प्रेमर्षि जी ओहि आलेखमे ई स्पष्ट लिखने छथि जे किनको नाम जे छुटि गेल छन्हि तँ से मात्र आलेखक लेखकक जानकारी नहि रहबाक द्वारे, एहिमे आन कोनो कारण नहि देखल जाय। अहाँसँ एहि विषयपर विस्तृत आलेख सादर आमंत्रित अछि।-सम्पादक)

७१.श्री मंत्रेश्वर झा- विदेह पढ़ल आ संगहि अहाँक मैगनम ओपस कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक सेहो, अति उत्तम। मैथिलीक लेल कएल जा रहल अहाँक समस्त कार्य अतुलनीय अछि।

७२. श्री हरेकृष्ण झा- कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक मैथिलीमे अपन तरहक एकमात्र ग्रन्थ अछि, एहिमे लेखकक समग्र दृष्टि आ रचना कौशल देखबामे आएल जे लेखकक फील्डवर्कसँ जुड़ल रहबाक कारणसँ अछि।

७३.श्री सुकान्त सोम- कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक मे समाजक इतिहास आ वर्तमानसँ अहाँक जुड़ाव बड्ड नीक लागल, अहाँ एहि क्षेत्रमे आर आगाँ काज करब से आशा अछि।

७४.प्रोफेसर मदन मिश्र- कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक सन किताब मैथिलीमे पहिले अछि आ एतेक विशाल संग्रहपर शोध कएल जा सकैत अछि। भविष्यक लेल शुभकामना।

७५.प्रोफेसर कमला चौधरी- मैथिलीमे कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक सन पोथी आबए जे गुण आ रूप दुनूमे निस्सन होअए, से बहुत दिनसँ आकांक्षा छल, ओ आब जा कऽ पूर्ण भेल। पोथी एक हाथसँ दोसर हाथ घुमि रहल अछि, एहिना आगाँ सेहो अहाँसँ आशा अछि।

७६.श्री उदय चन्द्र झा "विनोद": गजेन्द्रजी, अहाँ जतेक काज कएलहुँ अछि से मैथिलीमे आइ धरि कियो नहि कएने छल। शुभकामना। अहाँकेँ एखन बहुत काज आर करबाक अछि।

७७.श्री कृष्ण कुमार कश्यप: गजेन्द्र ठाकुरजी, अहाँसँ भेँट एकटा स्मरणीय क्षण बनि गेल। अहाँ जतेक काज एहि बएसमे कऽ गेल छी ताहिसँ हजार गुणा आर बेशीक आशा अछि।

७८.श्री मणिकान्त दास: अहाँक मैथिलीक कार्यक प्रशंसा लेल शब्द नहि भेटैत अछि। अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक सम्पूर्ण रूपेँ पढ़ि गेलहुँ। त्वञ्चाहञ्च बड्ड नीक लागल।

JUST RELEASED

1.Genome Mapping 450AD to 2009AD- Panji Prabandh of Mithila Vol.I-III authors Gajendra Thakur, Nagendra Kumar Jha & Panjikar Vidyanand Jha
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ISBN 978-81-907729-6-9
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2

Maithili Short Stories Gamak Jingi by Sh. Jagdish Prasad Mandal
ISBN 978-81-907729-4-5
Price: Rs. 150/- (INR)- for individual buyers in India and Nepal US $ 20 for Libraries and institutions (India and abroad)
(add courier charges Rs.50/-per copy India and Rs.100/for Nepal . Postage free for abroad.
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सुभाष चन्द्र यादव : बनैत बिगड़ैत



Ist edition 2009 of Subhash Chandra Yadav's Collection of Maithili Short stories BANAIT BIGRAIT
Language:Maithili
मूल्य भा. रु. 100/-(for individual buyers inside india)


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DISTRIBUTORS: AJAY ARTS, 4393/4A, Ist Floor,Ansari Road,DARYAGANJ. Delhi-110002 Ph.011-23288341, 09968170107
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e-mail: shruti.publication@shruti-publication.com

ANNOUNCEMENT
1. Name of Book: Maithili English Shabdakosh Vol I-XVI / English Maithili Dictionary Vol.I-XVI only hardbound edition

2. Authors Gajendra Thakur, Nagendra Kumar Jha and Panjikar Vidyanand Jha

3.copyright by: M/s Shruti Publication, e-mail:- shruti.publication@shruti-publication.com, website: http://www.shruti-publication.com/

4.Combined ISBN no. of Vol.I-XVI- 978-81-907729-2-1.Price: Rs.500/- per volume ($160 per volume for overseas buyers) book size 8 1/2 *11 inches .First three columns of Dictionary-Maithili word in phonetic roman unicode, tirhuta unicode and mithilakshara unicode. Next three column - meaning in phonetic roman unicode, tirhuta unicode and mithilakshara unicode. Seventh column is meaning in english and eighth column is for grammatical details. For prompt order send copy of order to their e-mail address too as mentioned above.(add courier charges Rs.50/-per copy for Delhi/NCR and Rs.100/- per copy for outside Delhi)
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The Series (Maithili English Dictionary) has been dedicated to Late Sh. Deenbandhu Jha, Late Sh. Jayakanta Mishra and Sh. Govind Jha.Bhavnath Mishra, Matinath Mishra 'Matang' and Yugal Kishore Mishra.
P.S. Maithili-English Dictionary Vol.I & II and English-Maithili Dictionary Vol.I has been made available for pdf download as well as for sale as print version.

NO ENTRY: MA PRAVISH
author- Professor Udaya Narayana Singh 'Nachiketa',

published by M/s Shruti Publication

The book in pdf form can be downloaded from:
https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi//

ISBN 978-81-907729-0-7 (Hardbound)
978-81-907729-1-4 (Paperback)

Price Rs. 75/- (Paperback), 25 dollar
Rs.125/- (Hardbound), 40 dollar(add courier charges Rs.20/-per copy for Delhi/NCR and Rs.40/- per copy for outside Delhi)
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नो एंट्री : मा प्रविश (चारि कल्लोलक मैथिली नाटक)

नाटककार उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’, निदेशक, केंद्रीय भाषा संस्थान, मैसूर

मैथिली साहित्यक सुप्रसिद्ध प्रयोगधर्मी नाटककार श्री नचिकेताजीक टटका नाटक, जे विगत 25 वर्षक मौनभंगक प्रस्तुत भ’ रहल अछि।


सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर


Tirhuta : 244 pages (A4 big magazine size)
विदेह: सदेह: 1: तिरहुता : मूल्य भा.रु.200/-

Devanagari 244 pages (A4 big magazine size)

विदेह: सदेह: 1: : देवनागरी : मूल्य भा. रु. 100/-

(add courier charges Rs.20/-per copy for Delhi/NCR and Rs.30/- per copy for outside Delhi)

BOTH VERSIONS ARE AVAILABLE FOR PDF DOWNLOAD AT

https://sites.google.com/a/videha.com/videha/

http://videha123.wordpress.com/


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विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/

विदेह: वर्ष:2, मास:13, अंक:25 (विदेह:सदेह:1)
सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर


सहायक सम्पादक: श्रीमती रश्मि रेखा सिन्हा


मुख्य पृष्ठ डिजाइन: विदेह:सदेह:1 ज्योति झा चौधरी
विदेह ई-पत्रिकाक साइटक डिजाइन मधूलिका चौधरी (बी.टेक, कम्प्यूटर साइंस), रश्मि प्रिया (बी.टेक, कम्प्यूटर साइंस) आ प्रीति झा ठाकुर द्वारा।


(विदेह ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ http://www.videha.co.in/ पर ई-प्रकाशित होइत अछि आ एकर सभटा पुरान अंक मिथिलाक्षर, देवनागरी आ ब्रेल वर्सनमे साइटक आर्काइवमे डाउनलोड लेल उपलब्ध रहैत अछि। विदेह ई-पत्रिका सदेह:1 अंक ई-पत्रिकाक पहिल 25 अंकक चुनल रचनाक संग पुस्तकाकार प्रकाशित कएल जा रहल अछि। विदेह:सदेह:2 जनवरी 2010 मे आएत ई-पत्रिकाक 26 सँ 50म अंकक चुनल रचनाक संग।)
(कार्यालय प्रयोग लेल) विदेह:सदेह:१ (तिरहुता/ देवनागरी)क अपार सफलताक बाद विदेह:सदेह:२ आ आगाँक अंक लेल वार्षिक/ द्विवार्षिक/ त्रिवार्षिक/ पंचवार्षिक/ आजीवन सद्स्यता अभियान। ओहि बर्खमे प्रकाशित विदेह:सदेहक सभ अंक/ पुस्तिका पठाओल जाएत। नीचाँक फॉर्म भरू:- विदेह:सदेहक देवनागरी/ वा तिरहुताक सदस्यता चाही: देवनागरी/ तिरहुता सदस्यता चाही: ग्राहक बनू (कूरियर/ रजिस्टर्ड डाक खर्च सहित):- एक बर्ख(२०१०ई.)::INDIAरु.२००/-NEPAL-(INR 600), Abroad-(US$25) दू बर्ख(२०१०-११ ई.):: INDIA रु.३५०/- NEPAL-(INR 1050), Abroad-(US$50) तीन बर्ख(२०१०-१२ ई.)::INDIA रु.५००/- NEPAL-(INR 1500), Abroad-(US$75) पाँच बर्ख(२०१०-१३ ई.)::७५०/- NEPAL-(INR 2250), Abroad-(US$125) आजीवन(२००९ आ ओहिसँ आगाँक अंक)::रु.५०००/- NEPAL-(INR 15000), Abroad-(US$750) हमर नाम: हमर पता: हमर ई-मेल: हमर फोन/मोबाइल नं.: हम Cash/MO/DD/Cheque in favour of AJAY ARTS payable at DELHI दऽ रहल छी। वा हम राशि Account No.21360200000457 Account holder (distributor)’s name: Ajay Arts,Delhi, Bank: Bank of Baroda, Badli branch, Delhi क खातामे पठा रहल छी। अपन फॉर्म एहि पतापर पठाऊ:- shruti.publication@shruti-publication.com AJAY ARTS, 4393/4A,Ist Floor,Ansari Road,DARYAGANJ,Delhi-110002 Ph.011-23288341, 09968170107,e-mail:, Website: http://www.shruti-publication.com (ग्राहकक हस्ताक्षर)

श्रुति प्रकाशनसँ

१.बनैत-बिगड़ैत (कथा-गल्प संग्रह)-सुभाषचन्द्र यादवमूल्य: भा.रु.१००/-

२.कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक (लेखकक छिड़िआयल पद्य, उपन्यास, गल्प-कथा, नाटक-एकाङ्की, बालानां कृते, महाकाव्य, शोध-निबन्ध आदिक समग्र संकलनखण्ड-१ प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना
खण्ड-२ उपन्यास-(सहस्रबाढ़नि)
खण्ड-३ पद्य-संग्रह-(सहस्त्राब्दीक चौपड़पर)
खण्ड-४ कथा-गल्प संग्रह (गल्प गुच्छ)
खण्ड-५ नाटक-(संकर्षण)
खण्ड-६ महाकाव्य- (१. त्वञ्चाहञ्च आ २. असञ्जाति मन )
खण्ड-७ बालमंडली किशोर-जगत)- गजेन्द्र ठाकुर मूल्य भा.रु.१००/-(सामान्य) आ $४० विदेश आ पुस्तकालय हेतु।

३. नो एण्ट्री: मा प्रविश- डॉ. उदय नारायण सिंह “नचिकेता”प्रिंट रूप हार्डबाउन्ड (मूल्य भा.रु.१२५/- US$ डॉलर ४०) आ पेपरबैक (भा.रु. ७५/- US$ २५/-)

४/५. विदेह:सदेह:१: देवनागरी आ मिथिला़क्षर स‍ंस्करण:Tirhuta : 244 pages (A4 big magazine size)विदेह: सदेह: 1: तिरहुता : मूल्य भा.रु.200/-
Devanagari 244 pages (A4 big magazine size)विदेह: सदेह: 1: : देवनागरी : मूल्य भा. रु. 100/-

६. गामक जिनगी (कथा स‍ंग्रह)- जगदीश प्रसाद म‍ंडल): मूल्य भा.रु. ५०/- (सामान्य), $२०/- पुस्तकालय आ विदेश हेतु)

७/८/९.a.मैथिली-अंग्रेजी शब्द कोश; b.अंग्रेजी-मैथिली शब्द कोश आ c.जीनोम मैपिंग ४५० ए.डी. सँ २००९ ए.डी.- मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध-सम्पादन-लेखन-गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा

P.S. Maithili-English Dictionary Vol.I & II ; English-Maithili Dictionary Vol.I (Price Rs.500/-per volume and $160 for overseas buyers) and Genome Mapping 450AD-2009 AD- Mithilak Panji Prabandh (Price Rs.5000/- and $1600 for overseas buyers. TIRHUTA MANUSCRIPT IMAGE DVD AVAILABLE SEPARATELY FOR RS.1000/-US$320) have currently been made available for sale.

१०.सहस्रबाढ़नि (मैथिलीक पहिल ब्रेल पुस्तक)-ISBN:978-93-80538-00-6 Price Rs.100/-(for individual buyers) US$40 (Library/ Institution- India & abroad)

११.नताशा- मैथिलीक पहिल चित्र श्रृंखला- देवांशु वत्स

१२.मैथिली-अंग्रेजी वैज्ञानिक शब्दकोष आ सार्वभौमिक कोष--गजेन्द्र ठाकुर Price Rs.1000/-(for individual buyers) US$400 (Library/ Institution- India & abroad)

13.Modern English Maithili Dictionary-Gajendra Thakur, Price Rs.1000/-(for individual buyers) US$400 (Library/ Institution- India & abroad)

[After receiving reports and confirming it (proof may be seen at http://www.box.net/shared/75xgdy37dr )that Mr. Pankaj Parashar copied verbatim the article Technopolitics by Douglas Kellner (email: kellner@gseis.ucla.edu) and got it published in Hindi Magazine Pahal (email:editor.pahal@gmail.com, edpahaljbp@yahoo.co.in and info@deshkaal.com website: www.deshkaal.com) in his own name. The author was also involved in blackmailing using different ISP addresses and different email addresses. In the light of above we hereby ban the book "Vilambit Kaik Yug me Nibadha" by Mr. Pankaj Parashar and are withdrawing the book and blacklisting the author with immediate effect.)

COMING SOON:

I.गजेन्द्र ठाकुरक शीघ्र प्रकाश्य रचना सभ:-

१.कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक सात खण्डक बाद गजेन्द्र ठाकुरक
कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक-२
खण्ड-८
(प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना-२) क संग

२.सहस्रबाढ़नि क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर उपन्यास
स॒हस्र॑ शीर्षा॒
३.सहस्राब्दीक चौपड़पर क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर पद्य-संग्रह
स॑हस्रजित्
४.गल्प गुच्छ क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर कथा-गल्प संग्रह
शब्दशास्त्रम्
५.संकर्षण क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर नाटक
उल्कामुख
६. त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन क बाद गजेन्द्र ठाकुरक तेसर गीत-प्रबन्ध


नाराश‍ं॒सी

७. नेना-भुटका आ किशोरक लेल गजेन्द्र ठाकुरक तीनटा नाटक
जलोदीप
८.नेना-भुटका आ किशोरक लेल गजेन्द्र ठाकुरक पद्य संग्रह
बाङक बङौरा
९.नेना-भुटका आ किशोरक लेल गजेन्द्र ठाकुरक खिस्सा-पिहानी संग्रह
अक्षरमुष्टिका

II.जगदीश प्रसाद म‍ंडल-
कथा-संग्रह- गामक जिनगी
नाटक- मिथिलाक बेटी
उपन्यास- मौलाइल गाछक फूल, जीवन संघर्ष, जीवन मरण, उत्थान-पतन, जिनगीक जीत
III.मिथिलाक संस्कार/ विधि-व्यवहार गीत आ गीतनाद -संकलन उमेश मंडल- आइ धरि प्रकाशित मिथिलाक संस्कार/ विधि-व्यवहार आ गीत नाद मिथिलाक नहि वरन मैथिल ब्राह्मणक आ कर्ण कायस्थक संस्कार/ विधि-व्यवहार आ गीत नाद छल। पहिल बेर जनमानसक मिथिला लोक गीत प्रस्तुत भय रहल अछि।
IV.पंचदेवोपासना-भूमि मिथिला- मौन

V.मैथिली भाषा-साहित्य (२०म शताब्दी)- प्रेमशंकर सिंह

VI.गुंजन जीक राधा (गद्य-पद्य-ब्रजबुली मिश्रित)- गंगेश गुंजन

VII.विभारानीक दू टा नाटक: "भाग रौ" आ "बलचन्दा"

VIII.हम पुछैत छी (पद्य-संग्रह)- विनीत उत्पल

IX.मिथिलाक जन साहित्य- अनुवादिका श्रीमती रेवती मिश्र (Maithili Translation of Late Jayakanta Mishra’s Introduction to Folk Literature of Mithila Vol.I & II)
X. स्वर्गीय प्रोफेसर राधाकृष्ण चौधरी-
मिथिलाक इतिहास, शारान्तिधा, A survey of Maithili Literature
XI. मैथिली चित्रकथा- नीतू कुमारी
XII. मैथिली चित्रकथा- प्रीति ठाकुर
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